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शुक्रवार, 23 मार्च 2018

पानी से सभी बिमारी का इलाज


शरीर मे सारी बीमारियाँ वात-पित्त और कफ के बिगड़ने से ही होती हैं !
अब आप पूछेंगे ये वात-पित्त और कफ क्या होता है ???
बहुत ज्यादा गहराई मे जाने की जरूरत नहीं आप ऐसे समझे की सिर से लेकर छाती के बीच तक जितने रोग होते हैं वो सब कफ बिगड़ने के कारण होते हैं
छाती के बीच से लेकर पेट और कमर के अंत तक जितने रोग होते हैं वो पित्त बिगड़ने के कारण होते हैं !
और कमर से लेकर घुटने और पैरों के अंत तक जितने रोग होते हैं वो सब वात बिगड़ने के कारण होते हैं !
हमारे हाथ की कलाई मे ये वात-पित्त और कफ की तीन नाड़ियाँ होती हैं !
भारत मे ऐसे ऐसे नाड़ी विशेषज्ञ रहे हैं जो आपकी नाड़ी पकड़ कर ये बता दिया करते थे कि आपने एक सप्ताह पहले क्या खाया एक दिन पहले क्या खाया -दो पहले क्या खाया !!
और नाड़ी पकड़ कर ही बता देते थे कि आपको क्या रोग है ! आजकल ऐसी बहुत ही कम मिलते हैं !
शायद आपके मन मे सवाल आए ये वात -पित्त कफ दिखने मे कैसे होते हैं ???
तो फिलहाल आप इतना जान लीजिये ! कफ और पित्त लगभग एक जैसे होते हैं !
आम भाषा मे नाक से निकलने वाली बलगम को कफ कहते हैं ! कफ थोड़ा गाढ़ा और चिपचिपा होता है !
मुंह मे से निकलने वाली बलगम को पित्त कहते हैं ! ये कम चिपचिपा और द्रव्य जैसा होता है !!
और शरीर से निकले वाली वायु को वात कहते हैं !! ये अदृश्य होती है !
कई बार पेट मे गैस बनने के कारण सिर दर्द होता है तो इसे आप कफ का रोग नहीं कहेंगे इसे पित्त का रोग कहेंगे !!
क्यूंकि पित्त बिगड़ने से गैस हो रही है और सिर दर्द हो रहा है !
ये ज्ञान बहुत गहरा है खैर आप इतना याद रखें कि इस वात -पित्त और कफ के संतुलन के बिगड़ने से ही सभी रोग आते हैं !
और ये तीनों ही मनुष्य की आयु के साथ अलग अलग ढंग से बढ़ते हैं ! बच्चे के पैदा होने से 14 वर्ष की आयु तक कफ के रोग ज्यादा होते है ! बार बार खांसी ,सर्दी ,छींके आना आदि होगा !
14 वर्ष से 60 साल तक पित्त के रोग सबसे ज्यादा होते हैं बार बार पेट दर्द करना ,गैस बनना ,खट्टी खट्टी डकारे आना आदि !!
और उसके बाद बुढ़ापे मे वात के रोग सबसे ज्यादा होते हैं घुटने दुखना ,जोड़ो का दर्द आदि
कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना !!
अब आप कहेंगे हम तो हमेशा यही करते हैं ! 99% लोग ऐसे होते है जो पानी लिए बिना खाना नहीं खाते है |पानी पहले होता है खाना बाद मे होता है |बहुत सारे लोग तो खाना खाने से ज्यादा पानी पीते है दो-चार रोटी के टुकडो को खाया फिर पानी पिया,फिर खाया-फिर पानी पिया !
ये जानना बहुत जरुरी है ...हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद क्या कारण है |
बात ऐसी है की हमारा जो शरीर है शरीर का पूरा केंद्र है हमारा पेट|ये पूरा शरीर चलता है पेट की ताकत से और पेट चलता है भोजन की ताकत से|जो कुछ भी हम खाते है वो ही हमारे पेट की ताकत है |हमने दाल खाई,हमने सब्जी खाई, हमने रोटी खाई, हमने दही खाया लस्सी पी कुछ भी दूध,दही छाझ लस्सी फल आदि|ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया ये सब कुछ हमको उर्जा देता है और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है |आप कुछ भी खाते है पेट उसके लिए उर्जा का आधार बनता है |अब हम खाते है तो पेट मे सब कुछ जाता है|पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है अमाशय|उसी स्थान का संस्कृत नाम है जठर|उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है epigastrium |ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है ये |बहुत छोटा सा स्थान हैं इसमें अधिक से अधिक 350GMS खाना आ सकता है |हम कुछ भी खाते सब ये अमाशय मे आ जाता है|
अब अमाशय मे क्या होता है खाना जैसे ही पहुँचता है तो यह भगवान की बनाई हुई व्यवस्था है जो शरीर मे है की तुरंत इसमें आग(अग्नि) जल जाती है |आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है उसी को कहते हे जठराग्नि|ये जठराग्नि है वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है |ये आग ऐसी ही होती है जेसे रसोई गेस की आग|आप की रसोई गेस की आग है ना की जेसे आपने स्विच ओन किया आग जल गयी|ऐसे ही पेट मे होता है जेसे ही आपने खाना खाया की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी |यह ऑटोमेटिक है,जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला की इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई|ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना पचता है |आपने खाना खाया और अग्नि जल गयी अब अग्नि खाने को पचाती है |वो ऐसे ही पचाती है जेसे रसोई गेस|आपने रसोई गेस पर बरतन रखकर थोडा दूध डाल दिया और उसमे चावल डाल दिया तो जब तक अग्नि जलेगी तब तक खीर बनेगी|इसी तरह अपने पानी डाल दिया और चावल डाल दिए तो जब तक अग्नि जलेगी चावल पकेगा|
अब अपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया|और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है |अब होने वाला एक ही काम है जो आग(जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ गयी|आग अगर बुझ गयी तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी|अब हमेशा याद रखें खाना पचने पर हमारे पेट मे दो ही क्रिया होती है |एक क्रिया है जिसको हम कहते हे Digation और दूसरी है fermentation|फर्मेंटेशन का मतलब है सडना और डायजेशन का मतलब हे पचना|
आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा,खाना पचेगा तो उसका रस बनेगा|जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा|ये तभी होगा जब खाना पचेगा|
अब ध्यान से पढ़े इन् शब्दों को मांस की हमें जरुरत है हम सबको,मज्जा की जरुरत है ,रक्त की भी जरुरत है ,वीर्य की भी जरुरत है ,अस्थि भी चाहिए,मेद भी चाहिए|यह सब हमें चाहिए|जो नहीं चाहिए वो मल नहीं चाहिए और मूत्र नहीं चाहिए|मल और मूत्र बनेगा जरुर ! लेकिन वो हमें चाहिए नहीं तो शरीर हर दिन उसको छोड़ देगा|मल को भी छोड़ देगा और मूत्र को भी छोड़ देगा बाकि जो चाहिए शरीर उसको धारण कर लेगा|
ये तो हुई खाना पचने की बात अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..?
अगर आपने खाना खाने के तुरंत बाद पानी पी लिया तो जठराग्नि नहीं जलेगी,खाना नहीं पचेगा और वही खाना फिर सड़ेगा|और सड़ने के बाद उसमे जहर बनेंगे|
खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड(uric acid )|कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है ,मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ,वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो|यह यूरिक एसिड विष (जहर ) है और यह इतना खतरनाक विष है की अगर अपने इसको कन्ट्रोल नहीं किया तो ये आपके शरीर को उस स्थिति मे ले जा सकता है की आप एक कदम भी चल ना सके|आपको बिस्तर मे ही पड़े रहना पड़े पेशाब भी बिस्तर मे करनी पड़े और संडास भी बिस्तर मे ही करनी पड़े यूरिक एसिड इतना खतरनाक है |इस लिए यह इतना खराब विष हे नहीं बनना चाहिए |
और एक दूसरा उदाहरण खाना जब सड़ता है तो यूरिक एसिड जेसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे LDL (Low Density lipoprotive) माने खराब कोलेस्ट्रोल(cholesterol )|जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP )हाय बीपी है आप पूछोगे कारण बताओ? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है |आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ? तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है |
इससे भी ज्यादा खतरनाक विष हे वो है VLDL(Very Low Density lipoprotive)|ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है |अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता|
खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides|जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका triglycerides बढ़ा हुआ हे तो समज लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है |
तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे,कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे,कोई LDL - VLDL के नाम से कहे समज लीजिए की ये विष हे और ऐसे विष 103 है |ये सभी विष तब बनते है जब खाना सड़ता है |
मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है ,कोई कहता हे मेराtriglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप ! की आपका खाना पच नहीं रहा है |कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे की खाना पच नहीं रहा है |
क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता|खाना पचने पर जो बनता है वो है मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र,अस्थि और खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड,कोलेस्ट्रोल,LDL-VLDL| और यही आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है !
पेट मे बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप heart attack कहते हैं !
तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है की जो हम खा रहे हे वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए और खाना ठीक से पचना चाहिए इसके लिए पेट मे ठीक से आग(जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए|क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं हे और खाना पकता भी नहीं है |रसोई मे आग नहीं हे आप कुछ नहीं पका सकते और पेट मे आग नहीं हे आप कुछ नहीं पचा सकते|
महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है |आपने क्या खाया कितना खाया वो महत्व नहीं हे कोई कहता हे मैंने 100 ग्राम खाया,कोई कहता है मैंने 200 ग्राम खाया,कोई कहता है मैंने 300 ग्राम खाया वो कुछ महत्व का नहीं है लेकिन आपने पचाया कितना वो महत्व है |आपने 100 ग्राम खाया और 100 ग्राम पचाया बहुत अच्छा है |और अगर आपने 200 ग्राम खाया और सिर्फ 100 ग्राम पचाया वो बहुत बेकार है |आपने 300 ग्राम खाया और उसमे से 100 ग्राम भी पचा नहीं सके वो बहुत खराब है !!
खाना पच नहीं रहा तो समझ लीजिये विष निर्माण हो रहा है शरीर में ! और यही सारी बीमारियो का कारण है ! तो खाना अच्छे से पचे इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया !!
भोजनान्ते विषं वारी (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है )
इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी मत पिये !
अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ???
तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना ! अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ??
बात ऐसी है ! जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं है ! पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है ! उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है ! (बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है )
पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की परिक्रिया शुरू होती है ! तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती हैं तब आप जितना इच्छा हो उतना पानी पिये !!
जो बहुत मेहनती लोग है (खेत मे हल चलाने वाले ,रिक्शा खीचने वाले पत्थर तोड़ने वाले !! उनको 1 घंटे के बाद ही रस बनने लगता है उनको एक घंटे बाद पानी पीना चाहिए !
अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं ???
तो खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं ! अब आप पूछेंगे ये 45 मिनट का calculation ????
बात ऐसी ही जब हम पानी पीते हैं तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है ! और अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है ! तो पानी - पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है ! तो आप खाना खाने से 45 मिनट पहले ही पाने पिये !

बुधवार, 3 जनवरी 2018

*आहिस्ता  चल  जिंदगी,अभी*

क्या खूब लिखा है -                                                                
*आहिस्ता  चल  जिंदगी,अभी*
*कई  कर्ज  चुकाना  बाकी  है*
*कुछ  दर्द  मिटाना   बाकी  है*
*कुछ   फर्ज निभाना  बाकी है*
                   *रफ़्तार  में तेरे  चलने से*
                   *कुछ रूठ गए कुछ छूट गए*
                   *रूठों को मनाना बाकी है*
                   *रोतों को हँसाना बाकी है*
*कुछ रिश्ते बनकर ,टूट गए*
*कुछ जुड़ते -जुड़ते छूट गए*
*उन टूटे -छूटे रिश्तों के*
*जख्मों को मिटाना बाकी है*
                    *कुछ हसरतें अभी  अधूरी हैं*
                    *कुछ काम भी और जरूरी हैं*
                    *जीवन की उलझ  पहेली को*
                    *पूरा  सुलझाना  बाकी     है*
*जब साँसों को थम जाना है*
*फिर क्या खोना ,क्या पाना है*
*पर मन के जिद्दी बच्चे को*
*यह   बात   बताना  बाकी  है*
                     *आहिस्ता चल जिंदगी ,अभी*
                     *कई कर्ज चुकाना बाकी    है*
                     *कुछ दर्द मिटाना   बाकी   है*  
                      *कुछ  फर्ज निभाना बाकी है !*

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

*छत्तीसगढ़िया कहां गंवागे*

कभू-कभू मोर मन मं,
           ये खियाल आवत हे।
इडली-दोसा ह संगी,
          सबो झन ल मिठावत हे।
चिला-फरा ह काबर,
           कोनो ल नइ भावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
           छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।

दूसर के रंग मं संगी,
            खुद ल रंगावत हे।
बासी-चटनी बोजइया,
            पुलाव ल पकावत हे।
पताल के झोझो नदागे,
           मटर-पनीर सुहावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
           छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।

अंगाकर के पूछइया,
               पिज्जा हट जावत हे।
बोबरा-चौसेला छोर के,
         सांभर-बड़ा सोरियावत हे।
भुलागे खीर बनाय बर,
        लइका ल मैगी खवावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
          छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।

तिहार मं नइये संगी,
            ठेठरी-खुरमी खवइया।
आजकल के बहू भइया,
          नवा-नवा रोटी बनइया।
अइरसा-पोपची भुला के,
      नमकीन-गुजिया बनावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
         छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।

अपन भाषा,अपन बोली,
          बचावव नारा लगावत हे।
जेने ह नरियावत हे,
                 तेने ह मिटावत हे।
छोर के हमर भाषा,
           अंग्रेजी मं गोठियावत हे।
छत्तीसगढ़ी भाषा ह,
          छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

शुरुआत



शुरुआत कैसे होगी यह बात आदमी के मन में इस कदर घर कर लेता है की वो शुरुआत करने से पहले ही अपना मन निराश कर बैठता है उन निराश होने वाले लोगो को  ये कहूँगा की नर हो ना निराश करो मन को आप लोगो ने ये पाठ तो बच्चो के मुह से सुना ही होगा ना रो ना निराश करो मन को ……………अब ये बात मेरे दिमाग में जैसे ही आई ये क्या मुझे तो एक नई शुरुवात मिल चुकी है मुझे रास्ता दिखाई देने लगा है क्योकि मुझे इस पाठ से जुदा हुआ एक किस्सा याद आया है जिसे मै आप सब के साथ बाटना चाहूँगा ………


यह बात लगभग 11 से 12 वर्ष पुरानी है

                 हुआ कुछ यु की मेरे परम मित्र कमलेश सिंह गंगवाल की एक बुक डिपो की दुकान थी जहाँ पर हम लोग गप्पे लगाते हुए बैठे हुए थे इतने में दो छोटे

छोटे  बच्चे  दुकान में आकर कमलेश से बोलता है भैया कलम देना कमलेश बोला कलम तो …………नई हे भाई ……………..बच्चो के चेहरे का भाव बदल गया वो दोनों मुह उतारकर जाने के लिए मुड़े मैंने देखा बच्चे नीरस हो गए है उनका उतरा मन देखकर मुझे अच्छा नहीं लगा सो मैंने उनसे पूछा तुमन कोन कक्षा मा पढतो जी वो रोनी सूरत बनाकर बोले दूसरी ये देखकर मुकेश नाम का एक लड़का बोला नर हो ना निराश करो मन को

 अब ये पाठ तो मैंने ना पढ़ा था ना सुना था  मुझे हो गयी थोड़ी सी गलतफहमी मैंने वो लाइन को इस तरह समझा  ना रो ना निराश करो मन को मुझे ऐसा इसलिए लगा क्योकि बच्चे दुखी थे तो उनको सांतावना देने के लिए जो भाव मेरे मन में था उससे यही प्रतीत हुआ की न रो न निराश करो मन को पर मेरे मित्र कमलेश की समझ देखिये उसने ये कहा नरवो ना निराश करो मन को अब हम दोनों में बहस छिड़ी की वो लाइन क्या थी उसका अर्थ क्या था और बच्चो की वस्तुस्तिथि को देखते हुए उस लाइन को क्या होना था ये एक पहेली बन गयी क्योकि उस जगह पर तीनो लाइन सही बैठती थी आप के हिसाब से  क्या होना चाहिए 

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2016

पुरखा के खेत अउ पुरखा के बारी

पुरखा के खेत के लिए चित्र परिणाम

पुरखा के खेत अउ पुरखा के बारी
बेंचें के नोहे राखेच भर के हे पारी

मइनखे कथे मोर खेत मोर बारी
अरे तोर नोहे  बबा...
एहा हरे हमर पुरखा के उधारी
 हमर काम तो करना हे रखवारी
 आज मोर ता काली तोर पारी

इही माटी मा कतको मालिक पच गेहे
तब ले ए खेत अउ बारी हा आज ले बच गेहे

करम के बाढी अउ करम के उधारी
छूटे के बेर तोला पड़हि भारी
बने बने करम कर
तहन काबर भटकबे
एकर दुवारी वोकर दुवारी।

जीतेन्द्र कुमार साहू


गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

मैं


उखाड़ फेको इस मैं  को
इस मैं  में बहुत बुराई है. २
मैं  में सिर्फ मैं  हू
ना कोई बहन ना भाई है
उखाड़ फेको इस मैं  को
इस मैं  में बहुत बुराई है इस मैं  में बहुत बुराई है

मैं  की कहानी ऐसी है
उबलते पानी जैसी है मैं
कड़कते धूप जैसी है मैं
दहकते आग जैसी है मैं
उखाड़ फेको इस मैं  को
इस मैं  में बहुत बुराई है इस मैं  में बहुत बुराई है

काजल से भी काली है मैं
पाप से भी भारी है मैं
भ्रष्टाचार की कहानी  है मैं
अफसरों का राजदुलारी है मैं
उखाड़ फेको इस मैं  को
इस मैं  में बहुत बुराई है इस मैं  में बहुत बुराई है

शैतानों के लिए इक शान है मैं
नेताओं के लिए इक अधिकार  है मैं
किसानो के लिए इक मेहमान है मैं
इंसानियत के लिए इक अभिमान है मैं
उखाड़ फेको इस मैं  को
इस मैं  में बहुत बुराई है इस मैं  में बहुत बुराई है

मैं  की सृष्टी में मै ही भगवान है
मैं  के शासन में मै ही सरकार है
मैं ही साक्षी है
और मैं ही साकार है
उखाड़ फेको इस मैं  को
इस मैं  में बहुत बुराई है इस मैं  में बहुत बुराई है

कौन बच सका है इस मैं  से
इस मैं  में बहुत बुराई है इस मैं  में बहुत बुराई है
उखाड़ फेको इस मैं  को
इस मैं  में बहुत बुराई है इस मैं  में बहुत बुराई है