क्या खूब लिखा है -
*आहिस्ता चल जिंदगी,अभी*
*कई कर्ज चुकाना बाकी है*
*कुछ दर्द मिटाना बाकी है*
*कुछ फर्ज निभाना बाकी है*
*रफ़्तार में तेरे चलने से*
*कुछ रूठ गए कुछ छूट गए*
*रूठों को मनाना बाकी है*
*रोतों को हँसाना बाकी है*
*कुछ रिश्ते बनकर ,टूट गए*
*कुछ जुड़ते -जुड़ते छूट गए*
*उन टूटे -छूटे रिश्तों के*
*जख्मों को मिटाना बाकी है*
*कुछ हसरतें अभी अधूरी हैं*
*कुछ काम भी और जरूरी हैं*
*जीवन की उलझ पहेली को*
*पूरा सुलझाना बाकी है*
*जब साँसों को थम जाना है*
*फिर क्या खोना ,क्या पाना है*
*पर मन के जिद्दी बच्चे को*
*यह बात बताना बाकी है*
*आहिस्ता चल जिंदगी ,अभी*
*कई कर्ज चुकाना बाकी है*
*कुछ दर्द मिटाना बाकी है*
*कुछ फर्ज निभाना बाकी है !*
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बुधवार, 3 जनवरी 2018
*आहिस्ता चल जिंदगी,अभी*
मंगलवार, 21 नवंबर 2017
*छत्तीसगढ़िया कहां गंवागे*
कभू-कभू मोर मन मं,
ये खियाल आवत हे।
इडली-दोसा ह संगी,
सबो झन ल मिठावत हे।
चिला-फरा ह काबर,
कोनो ल नइ भावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।
दूसर के रंग मं संगी,
खुद ल रंगावत हे।
बासी-चटनी बोजइया,
पुलाव ल पकावत हे।
पताल के झोझो नदागे,
मटर-पनीर सुहावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।
अंगाकर के पूछइया,
पिज्जा हट जावत हे।
बोबरा-चौसेला छोर के,
सांभर-बड़ा सोरियावत हे।
भुलागे खीर बनाय बर,
लइका ल मैगी खवावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।
तिहार मं नइये संगी,
ठेठरी-खुरमी खवइया।
आजकल के बहू भइया,
नवा-नवा रोटी बनइया।
अइरसा-पोपची भुला के,
नमकीन-गुजिया बनावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।
अपन भाषा,अपन बोली,
बचावव नारा लगावत हे।
जेने ह नरियावत हे,
तेने ह मिटावत हे।
छोर के हमर भाषा,
अंग्रेजी मं गोठियावत हे।
छत्तीसगढ़ी भाषा ह,
छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।